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Wednesday, May 31, 2023

Brij Bhushan Sharan Singh पर पहलवानों के आरोप और सांसद के दांव-पेंच


 


बृज भूषण शरण सिंह Brij Bhushan Sharan Singh। यह नाम इन दिनों भारत ही नहीं देश के बाहर भी काफी चर्चा में है। इसकी वजह भी बेहद खास है। 134 दिन पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर अचानक कुछ पहलवानों ने धरना शुरू कर दिया। इनमें ओलिंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया Bajrang Punia, साक्षी मलिक Sakshi Malik और विनेश फोगाट Vinesh Fogat सरीखे नामी पहलवान शामिल थे। इन्होंने भारतीय कुश्ती संघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर बेहद संगीन आरोप लगाए। खिलाड़ियों का कहना था कि सिंह ने कई महिला पहलवान खिलाड़ियों के साथ यौन शोषण किया है।

बस… इसके बाद खेल मंत्रालय, पहलवानों, भारतीय ओलिंपिक महासंघ और बृजभूषण शरण सिंह के बीच पहले बैठकों का फिर आरोपों, प्रत्यारोपों का ऐसा दौर चला कि यह दो पक्षों के बीच सबसे लंबे समय तक चलने वाला दंगल बन गया। इसमें कोई भी पक्ष हार मानने को राजी नहीं है। जहां महिला पहलवानों ने सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बृज भूषण शरण सिंह पर एफआईआर के लिए पुलिस पर दबाव बनाया और एक नाबालिग खिलाड़ी की शिकायत के आधार पर पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज भी किया गया, वहां सिंह इस बात पर अड़े रहे कि वे कतई गुनहगार नहीं हैं, इसलिए पीछे नहीं हटेंगे। वे तो यह तक बोल चुके हैं कि अगर दोषी हों तो फांसी पर चढ़ जाने को भी तैयार हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के कई किरदार हैं, कुछ परदे के सामने हैं तो कुछ परदे के पीछे। अगर हम मुख्य किरदारों को देखें तो अब मैदान में कुल 5 किरदार बचे हैं। बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, नाबालिग पहलवान जिसकी शिकायत पर पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज हुआ और बृज भूषण शरण सिंह। सभी पहलवानों के निशाने पर हैं सिंह। लेकिन वे एक भी कदम पीछे हटने को राजी नहीं है। आखिर ऐसा क्या है कि सुप्रीम कोर्ट के दखल पर पाक्सो के तहत एफआईआर के बाद भी न तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर रही है, ना ही वे खुद सरेंडर करने को राजी हैं।

बृज भूषण शरण सिंह पहलवान रहे हैं और राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी भी। वे राजनीति और कुश्ती के अखाड़े के तमाम दांवपेंच जानते हैं। उन्हें पता है कि उनकी एक कमजोर चाल दुश्मन को उन्हें चित करने का मौका दे देगी। ऐसे में वे खुद को बचाने और सामने वाले पक्ष पर हमला करने का कोई मौका नहीं चूकते। आइए एक बार उनकी शख्सियत के कुछ खास पहलुओं को देखते हैं।


अपनी ही पार्टी की आलोचना करने से पीछे नहीं हटते


पिछले साल जब यूपी बारिश और बाढ़ की चपेट में था, ऐसे में बृज भूषण शरण सिंह ने अपने चुनाव क्षेत्र में चल रहे राहत कार्यों को देखकर अपनी ही पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने बेबाक होकर कहा कि , "पहले कोई भी सरकार होती थी, तब बाढ़ के पहले एक बैठक होती थी. हमको नहीं लगता कि कोई तैयारी की बैठक हुई है और यहां लोग भगवान के भरोसे हैं।" उस समय यूपी के 6 बार के सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने ये भी कहा, "बाढ़ से राहत के लिए ऐसी ख़राब व्यवस्था मैंने अपनी जीवन में पहले कभी नहीं देखी। अफ़सोस ये है कि हम लोग रो भी नहीं सकते। अपने भाव को व्यक्त भी नहीं कर सकते।" जाहिर है कि उनके ऐसे बयान उनके क्षेत्र के लोगों के मन में उनके लिए सम्मान और अपनापन ही लाएंगे।

कांट्रैक्ट सिस्टम लागू किया, क्या इसलिए नाराज हैं पहलवान


चाहे राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट हों या अंतरराष्ट्रीय, चाहे सीनियर टूर्नामेंट हो या जूनियर, भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बनाए जाने के बाद बृज भूषण शरण सिंह हर मंच पर एक प्रशासक के रूप में हमेशा बेहद सक्रिय तौर पर नजर आए। अपने हाथ में माइक्रोफ़ोन लेकर अक्सर रेफ़री को सलाह देते भी दिखे। कभी-कभी तो जजों को रूल बुक समझाते भी नज़र आए।

बृज भूषण सिंह ने 2018 में कुश्ती में अनुबंध व्यवस्था यानी कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम की शुरुआत की। इस व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों को अलग-अलग ग्रेड में रखते हुए एक साल का अनुबंध दिया जाता है।

इस व्यवस्था के तहत ग्रेड ए के खिलाड़ियों को 30 लाख रुपये, ग्रेड बी के खिलाड़ियों को 20 लाख रुपये, ग्रेड सी के पहलवानों को 10 लाख रुपये और ग्रेड डी में 5 लाख रुपये देने का प्रावधान है।

पहली बार जब ये व्यवस्था लागू की गई तब ग्रेड ए में बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट और पूजा ढांडा को रखा गया था। वहीं ग्रेड बी में सुशील कुमार और साक्षी मलिक जबकि ग्रेड सी में रितु फोगाट और दिव्या काकरान जैसी खिलाड़ियों को रखा गया था।

सिंह बताते हैं, पहले हमारे देश में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के लिए अलग नियम था। तब नियम था कि जो खिलाड़ी कोटा लेकर आएगा, वही खेलने जाएगा।” उन्होंने कहा, “आपको याद हो कि नरसिंह यादव वर्ल्ड चैंपियनशिप के माध्यम के ओलंपिक में क्वालिफाई किए थे और सुशील कुमार, जिनके पास डबल मेडल थे, उन्होंने मांग की थी कि इनका ट्रायल कराया जाए। लेकिन उस वक़्त हमारा नियम था कि जो क्वालिफाई करके आया है, वही जाएगा। इसके बाद विवाद हुआ और सुशील कुमार और नरसिंह यादव का ट्रायल नहीं हो पाया।”

सिंह ने कहा कि इस बार के ओलिंपिक में मैंने महसूस किया कि इस व्यवस्था में परिवर्तन की ज़रूरत है, क्योंकि कई देशों में यह व्यवस्था चल रही है। मान लीजिए कोई रेसलर है, जिसने क्वालिफाई किया और उसे हल्की-फुल्की चोट आ गई या तबियत खराब है, तब भी वह नहीं बताता है कि हमारी तबियत खराब है, तब भी वह नहीं बताता कि हमको चोट है क्योंकि अगर मेडल नहीं भी आएगा तो कम से कम ओलिंपियन तो कहे ही जाएंगे।

लाया गया नया नियम


उन्होंने आगे कहा कि कई देशों का अध्ययन करने, इन खिलाड़ियों से और कोचों से बात करने के बाद एक कमेटी बनाई और इसमें ये फैसला किया अब अगर ओलंपिक में कोई भी क्वालिफाई करके आता है, तो उनको ट्रायल देना पड़ेगा क्योंकि वो कोटा खिलाड़ी नहीं, देश का होता है।

कैसे होगा ट्रायल?, इसी बात का विरोध है


बजृभूषण शरण सिंह के मुताबिक, “ट्रायल के पहले जो कैंप के खिलाड़ी हैं, उनका आपस में ट्रायल होगा और जो उसमें अव्वल आएगा, उसके बीच और क्वालिफाई करके आने वाले के बीच एक मुकाबला होगा। जो क्वालिफाई करके आए हैं ये उसे हरा देते हैं (जो कैम्प ट्रायल में नंबर वन आया है) जो देश में अव्वल आया है, तो इनका कोटा कंफर्म हो जाएगा। अगर क्वालिफाई करने वाला खिलाड़ी कुश्ती हार जाता है, तो 15-20 दिन के बाद इनको उस बच्चे को हराने का एक और मौका मिलेगा क्योंकि ये क्वालिफाई करके आए हैं। अगर कोई नया बच्चा आता तो पहले उसे देश के बच्चों के हराना होगा। सिंह कहते हैं कि विरोध कर रहे पहलवानों को इसी बात का विरोध है।

रामदेव और पतंजलि के घी को भी नहीं छोड़ा


बाबा रामदेव भाजपा के समर्थक माने जाते हैं। लेकिन बृज भूषण शरण सिंह ने उनको और उनकी कंपनी पतंजलि को भी नहीं बख्शा। उन्होंने पतंजलि पर नकली घी बेचने का आरोप लगा दिया। तब पतंजलि ने उन्हें लीगल नोटिस भेज कर माफ़ी मांगने को कहा था, लेकिन सांसद ने माफ़ी नहीं मांगी थी। इसके बाद पतंजलि की ओर से उन्हें दोबारा नोटिस भेजा गया तो वो बिफर पड़े। उन्होंने कहा, "जिन महर्षि पतंजलि के नाम का उपयोग किया जा रहा है, उनकी जन्मभूमि उपेक्षा की शिकार है। महर्षि पतंजलि के नाम का उपयोग बंद होना चाहिए।" यह भी कहा कि अगर महर्षि पतंजलि के नाम का दुरुपयोग बंद नहीं हुआ तो वे इसे लेकर देशव्यापी आंदोलन करेंगे।

39 एफआईआर पर सजा एक में भी नहीं, यह संयाेग है या प्रयोग




जंतर मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों ने 28 अप्रैल को एक लिस्ट सार्वजनिक तौर प्रदर्शित की। इसमें बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ दर्ज 38 मामलों की पूरी सूची दी गई थी। अगर नाबालिग पहलवान की शिकायत पर दर्ज एक और केस गिन लें तो ये कुल 39 मामले हो जाते हैं। लेकिन यह अजब संयोग है कि सांसद महोदय को इनमें से एक भी केस में सजा नहीं मिली। यानी वे बिना सजा वाले हिस्ट्रीशीटर हैं। छह बार के सांसद, बृज भूषण पर चोरी, दंगा, हत्या, आपराधिक धमकी, हत्या का प्रयास, अपहरण आदि सहित विभिन्न आरोपों के तहत 38 मामले दर्ज हैं। ये सभी 1974 और 2007 के बीच दर्ज किए गए थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यूपी गुंडा अधिनियम के तहत एक मामला और उस अवधि में कड़े गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत तीन अन्य मामले भी दर्ज हैं। उनके सहयोगियों की मानें तो इन सभी मामलों में सांसद को बरी कर दिया गया था। एक मामले में ट्रायल कोर्ट से बरी होने के खिलाफ अपील इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित है। जबकि उनका एक वीडियो इस बीच काफी वायरल हुआ, जिसमें वे खुद यह बताते दिखे कि उन्हेांने एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या की थी।

बहरहाल, अब तक चले मामले में बृजभूषण तार्किक तौर पर पहलवानों के आरोपों पर भारी पड़ते ही नजर आ रहे हैं। वे बार-बार यही बात कह रहे हैं कि पहलवान उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के सबूत दें। अब पहलवानों ने पुलिस को दिए बयानों में क्या सबूत दिए हैं, यह तो पुलिस की रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा, पर कम से कम जिस तरह सार्वजनिक तौर पर वे बृजभूषण पर हमलावर हैं, उस संदर्भ में यह आश्चर्यजनक ही लगता है कि अगर वास्तव में उनके पास कोई ठोस सबूत होते तो क्या वे अब तक उसे मीडिया के सामने सार्वजनिक न कर चुके होते।

इस कड़ी में हम आगे पहलवानों के किरदार के डिटेल भी जानेंगे…

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