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Thursday, June 1, 2023

Brij Bhushan Sharan Singh पर पहलवानों की FIR, जांच समिति पर भी गंभीर आरोप

Brij Bhushan Sharan Singh के खिलाफ दर्ज FIR की डिटेल सामने आईं




एक भी आरोप साबित हुए तो फांसी लगा लूंगा। Brij Bhushan Sharan Singh ने यह बात पहले भी कही थी, और हाल में भी दो तीन बार दोहरा दी है। इसी बीच पहलवानों की ओर से दर्ज FIR की डिटेल्स सामने आ गई हैं। ये काफी हैरान करने वाली हैं। इन्हें पढ़कर आपकी सांस ही मानो थम जाएगी। क्या वास्तव में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर, गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली महिला पहलवानों के साथ ऐसा बर्ताव हुआ है। अगर इन FIR में लगाए आरोप सही हैं तो शायद Brij Bhushan Sharan Singh को अपने कहे पर अमल न करना पड़ जाए।

आइए आपको पहले FIR की कॉपी पढ़वाते हैं। महिला पहलवानों के नाम गुप्त रखने के लिए केवल खास बातें ही हाइलाइट की गई हैं।















यह देखते हैं कि नाबालिग पहलवान के पिता ने क्या आरोप लगाए


बेटी ने एशियन चैंपियनशिप में 62KG फ्री स्टाइल में गोल्ड मेडल जीता। फिर 16 साल की उम्र में झारखंड के रांची में नेशनल गेम्स में जूनियर रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता।

बेटी के साथ फोटो लेने के लिए Brij Bhushan Sharan Singh ने जबरन उसे अपने पास खींचा। उसे बांहों में इतना कसकर जकड़ लिया कि वह खुद को छुड़ाने के लिए हिल तक नहीं पाई। फोटो लेने के बहाने बृजभूषण ने उसे और जोर से अपनी तरफ जकड़ा और उसके कंधे को भी जोर से दबाया। इसके बाद वह अपना हाथ सरकाते हुए कंधे से नीचे ले गया और नाबालिग पहलवान की छाती पर फिराने लगा।

बृजभूषण ने नाबालिग पहलवान को कहा- तू मेरे को सपोर्ट कर, मैं तेरे को सपोर्ट करूंगा, मेरे साथ टच में रहना। यह सुनकर पहलवान ने कहा- सर, मैं अपने बलबूते यहां तक आई हूं और आगे भी मेहनत करके आगे तक जाऊंगी। यह सुनकर बृजभूषण ने कहा- एशियन चैंपियनशिप के ट्रायल जल्द होने वाले हैं। वह उसके साथ कोऑपरेट नहीं कर रही तो इसका खामियाजा आने वाले ट्रायल्स में भुगतना पड़ेगा।

इसके बाद बृजभूषण ने नाबालिग पहलवान को कमरे में बुलाया। नाबालिग पहलवान प्रेशर में थी कि उसका करियर बृजभूषण बर्बाद न कर दे, इसलिए वह मिलने चली गई। वहां पहुंचते ही बृजभूषण ने उसे अपनी तरफ खींचा और जबरदस्ती शारीरिक संबध बनाने की कोशिश की। नाबालिग पहलवान इससे पूरी तरह सहम गई। उसने किसी तरह खुद को बृजभूषण के चंगुल से छुड़ाया और कमरे से बाहर भाग निकली।

2022 के मई महीने में एशियन चैंपियनशिप के ट्रायल हुए। जहां बृजभूषण ने कहे मुताबिक नाबालिग पहलवान के साथ भेदभाव किया। ट्रायल्स में यह सामान्य प्रैक्टिस है कि नेशनल चैंपियनशिप में जिस पहलवान ने गोल्ड मेडल जीता हो, उसे ट्रायल्स में तरजीह दी जाती है। इसके बावजूद उसकी बात न मानने पर बृजभूषण के इशारे पर नाबालिग पहलवान को सभी स्ट्रॉन्ग एथलीट्स को ग्रुप में डाल दिया गया। हालांकि प्रैक्टिस यह है कि सभी स्ट्रॉन्ग एथलीट्स को अलग-अलग ग्रुप में डाला जाता है ताकि उन सभी को इंडिया को रिप्रेजेंट करने का बेहतर मौका मिल सके।

इसी ट्रायल में एक और बात हुई। ट्रायल के दौरान एथलीट के स्टेट से ही रेफरी और मैट चेयरमैन, दोनों नहीं हो सकते। नाबालिग पहलवान के ट्रायल के दौरान उसे दिल्ली के पहलवान के साथ लड़ाया गया। जिसमें रेफरी और मैट चेयरमैन दोनों दिल्ली से थे। जो बिल्कुल नियमों का उल्लंघन था। नाबालिग पहलवान ने वहीं पर इसका विरोध किया। इस पर उसे दो-टूक कहा गया कि उसे खेलना होगा, अन्यथा मुकाबले के दूसरे एथलीट को वॉकओवर यानी विजेता घोषित कर दिया जाएगा। ट्रायल में वह पॉइंट स्कोर करती तो रेफरी और मैट चेयरमैन कहते कि घड़ी रुक चुकी थी।

इस ट्रायल्स के दौरान सभी मैचों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही थी। मगर, नाबालिग पहलवान के मैच के वक्त रिकॉर्डिंग को स्विच ऑफ और ऑन किया जाता रहा ताकि वीडियो में गड़बड़ी कर सकें। नाबालिग पहलवान के पिता ने कहा कि ये सब बृजभूषण के कहने पर किया गया क्योंकि मेरी बेटी ने उसकी यौन इच्छा पूरी करने से इनकार कर दिया था।

नाबालिग पहलवान के पिता ने कहा कि यह नॉर्मल प्रैक्टिस है कि जब कोई खिलाड़ी गोल्ड मेडल जीत लेता है तो उसे कई कंपनियों से स्पांसरशिप मिलती है। इसकी अरेंजमेंट फेडरेशन करती है। जब नाबालिग पहलवान ने बृजभूषण की बात नहीं मानी तो उससे स्पांसरशिप छीन ली गई। यह स्पांसरशिप उस एथलीट को दे दी गई, जिसने गोल्ड मेडल नहीं जीता था।

2022 में जब नाबालिग पहलवान लखनऊ ट्रायल्स में प्रैक्टिस कर रही थी तो बृजभूषण फिर उसके पास आया। बृजभूषण ने उसे 'पर्सनली आकर मिलने' को कहा। नाबालिग पहलवान ने उसे कहा कि मैं पहले ही उसकी फिजिकल रिलेशन की मांग को ठुकरा चुकी हूं। वह बार-बार परेशान न करे। नाबालिग पहलवान के पिता ने कहा- मेरी बेटी की उम्र साढ़े 17 साल है। यह उसके करियर की शुरूआत है। बृजभूषण जैसे आरोपी के रहते उनकी बेटी पहलवानी नहीं कर सकती।

बालिग पहलवानों ने ये आरोप लगाए

इस मामले की पहली FIR भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल), 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना) और 34 (सामान्य इरादे) के तहत दर्ज हुई है। इसमें Brij Bhushan Sharan Singh और WFI सचिव विनोद तोमर का नाम है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सभी महिला एथलीट जब भी अपने कमरे से निकलती थीं तो ग्रुप में चलती थीं, ताकि अकेले आरोपी से मिलने से बच सकें। एक अन्य पहलवान ने आरोप लगाया है कि एक अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान बृजभूषण ने होटल के रेस्तरां में खाने की मेज पर उसे गलत नीयत से छुआ।

इन हरकतों से वह गहरे सदमे में आ गई। कुछ दिनों तक न तो ठीक से सो सकी और न ही ठीक से खा सकी। भारत में एक लीग के दौरान और फिर दो साल के दौरान दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दिल्ली में महासंघ कार्यालय में उन्हें फिर से गलत तरीके से छुआ गया था।

शिकायतकर्ता का दावा है कि PMO में एक बैठक के दौरान, उसने ऐसे यौन, भावनात्मक, शारीरिक, शारीरिक आघात के बारे में बताया गया।

इलाज के बहाने शारीरिक संबंध बनाने की मांग


एक अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में बृजभूषण ने पहली बार उनका यौन उत्पीड़न किया था, जब कथित तौर पर उनकी टी-शर्ट उतारी और उनकी सांस की जांच के बहाने गलत तरीके से छुआ।

एक महिला खिलाड़ी का दावा है कि उस चैम्पियनशिप के दौरान उन्हें चोट लग गई थी और भारत आने के बाद उन्हें फेडरेशन के ऑफिस में बुलाया गया था। बृजभूषण ने कथित तौर पर उससे कहा कि महासंघ उसके इलाज का खर्च वहन करने को तैयार है, बशर्ते वह फिजिकल रिलेशन बना ले।

जांच कमेटी ने कई बार बंद किए कैमरे

खिलाड़ी के मुताबिक, वह WFI प्रमुख के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए गठित पैनल के सदस्यों के सामने कैमरे के सामने पेश हुई थी। इस दौरान रिकॉर्डिंग डिवाइस को बार-बार बंद कर दिया गया।  इससे उसे ऐसा लगता है कि उसके बयान के साथ छेड़छाड़ हो सकती है।

महासंघ कार्यालय में जबरदस्ती की कोशिश

बृजभूषण ने एक अंतरराष्ट्रीय चैम्पियनशिप के दौरान उसे गलत तरीके से छुआ और चैम्पियनशिप के बाद जब वह नई दिल्ली में महासंघ कार्यालय गई तो उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश की। यौन उत्पीड़न और पीछा करने की घटना ने उसे आघात पहुंचाया है।

इन हरकतों की वजह से वह मानसिक रूप से परेशान थी। जिस कारण उसके लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं पर ध्यान केंद्रित करना और अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता का प्रदर्शन करना मुश्किल था।

अब देखते हैं कि ब्रजभूषण पर आरोप लगा रहे और धरना दे रहे पहलवानों की झोली में कितने मेडल हैं।


1.बजरंग पूनिया




ओलंपिक
- टोक्यो ओलंपिक 2020 (65 किलो): ब्रॉन्ज

वर्ल्ड चैम्पियनशिप
- बुडापेस्ट 2018 (65 किलो): सिल्वर
- बुडापेस्ट 2013 (60 किलो): ब्रॉन्ज
- नूर-सुल्तान 2019 (65 किलो): ब्रॉन्ज
- बेलग्राद 2022 (65 किलो): ब्रॉन्ज

एशियन गेम्स
- जकार्ता 2018 (65 किलो): गोल्ड
- इंचेयॉन 2014 (61 किलो): सिल्वर

 


कॉमनवेल्थ गेम्स
- गोल्ड कोस्ट 2018 (65 किलो): गोल्ड
- बर्मिंघम 2022 (65 किलो): गोल्ड
- ग्लास्गो 2014 (61 किलो): सिल्वर

एशियन चैम्पियनशिप
- नई दिल्ली 2017 (65 किलो): गोल्ड
- शियान 2019 (65 किलो): गोल्ड
- अस्ताना 2014 (61 किलो): सिल्वर
- नई दिल्ली 2020 (65 किलो): सिल्वर
- अल्माटी 2021 (65 किलो): सिल्वर
- उलानबटार 2022 (65 किलो): सिल्वर
- नई दिल्ली 2013 (60 किलो): ब्रॉन्ज
- बिशेक 2018 (65 किलो): ब्रॉन्ज

कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप
- ब्राकपेन 2017 (65 किलो): गोल्ड
- सिंगापुर 2016 (65 किलो): गोल्ड


2. साक्षी मलिक




ओलंपिक
- रियो ओलंपिक 2016 (58 किलो): ब्रॉन्ज

कॉमनवेल्थ गेम्स
- बर्मिंघम 2022 (62 किलो): गोल्ड
- ग्लास्गो 2014 (58 किलो): सिल्वर
- गोल्ड कोस्ट 2018 (62 किलो): ब्रॉन्ज



एशियन चैम्पियनशिप
- दोहा 2015 (60 किलो): ब्रॉन्ज
- नई दिल्ली 2017 (60 किलो): सिल्वर
- बिशेक 2018 (62 किलो): ब्रॉन्ज
- शियान 2019 (62 किलो): ब्रॉन्ज

कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप
- जोहान्सबर्ग 2013 (63 किलो): ब्रॉन्ज
- जोहान्सबर्ग 2016 (62 किलो): गोल्ड



3. विनेश फोगाट

वर्ल्ड चैम्पियनशिप
- बेलग्राद 2022 (53 किलो): ब्रॉन्ज
- नूर-सुल्तान 2019 (53 किलो): ब्रॉन्ज
- जकार्ता 2018 (50 किलो): गोल्ड
- इंचियान 2014 (48 किलो): ब्रॉन्ज

कॉमनवेल्थ गेम्स
- ग्लास्गो 2014 (48 किलो): गोल्ड
- गोल्ड कोस्ट 2018 (50 किलो): गोल्ड
- बर्मिंघम 2022 (53 किलो): गोल्ड

एशियन चैम्पियनशिप
- अल्माटी 2021 (53 किलो): गोल्ड
- दोहा 2015 (48 किलो): सिल्वर
- नई दिल्ली 2017 (55 किलो): सिल्वर
- बिशेक 2018 (50 किलो): सिल्वर
- नई दिल्ली 2013 (51 किलो): ब्रॉन्ज
- बैंकॉक 2016 (53 किलो): ब्रॉन्ज
- शियान 2019 (53 किलो): ब्रॉन्ज
- नई दिल्ली 2020 (53 किलो): ब्रॉन्ज

इन पुरस्कारों से भी हैं सम्मानित
- बजरंग पूनियाः 2019 में पद्मश्री और खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित. 2015 में अर्जुन अवॉर्ड से नवाजे गए।
- साक्षी मलिकः 2017 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया. इससे पहले 2016 में खेल रत्न अवॉर्ड मिला।.
- विनेश फोगाटः 2020 में सरकार ने खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया. 2016 में अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा।

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है, इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है

पहले मशहूर शायर शहरयार की यह ग़ज़ल पढ़िए... सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है दिल है तो धड़कने...