Search This Blog

Showing posts with label 2000 Note. Show all posts
Showing posts with label 2000 Note. Show all posts

Friday, May 19, 2023

देश के सबसे बड़े नोट की सबसे छोटी उम्र, अब यादों में रहेगा

 6  साल, 6 महीने और 12 दिन जीकर 2000 के नोटों ने ली विदाई... अब जानिए रिजर्व बैंक से 15 सवालों के जवाब




लीजिए, हो गई विदाई। अभी की तो बात है, महज 2384 दिन ही तो हुए थे इसे जन्म लिए हुए। बेचारा अपना 10वां जन्मदिन भी नहीं बना पाया और निर्मम नियति ने इसे हमसे जुदा कर दिया। हम 2000 के करारे-करारे नोटों की बात कर रहे हैं। महज 6 साल, 6 महीने और 12 दिन पहले 8 नवंबर 2016 को भारतीय रिजर्व बैंक ने इसके दुनिया में आने की घोषणा की थी। आरबीआई गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल के दस्तखत वाले गुलाबी-गुलाबी नोटों को लोगों ने हाथों-हाथ लिया। 

नए नोट आने की कुछ लोगों में तो इतनी खुशी थी कि वे 500 और 1000 वाले नोटों को बंद किए जाने का दुख भी भूल गए। लेकिन कहते हैं ना कि जो आता है एक दिन उसे जाना भी होता है। पर किसे मालूम था कि तमाम न्यूज चैनलों में चिप वाले नोट के नाम से मशहूर और इसी वजह से जगह-जगह छापे पड़ने के लिए बदनाम बेचारा 2000 वाला नोट महज साढ़े छह साल के लिए ही इस दुनिया में आया है। 

आइए, इससे पहले कि हम इस नोट पर और बात करें, पहले रिजर्व बैंक का वह पहला आदेश देखते हैं जो उसने 8 नवंबर 2016 को 2000 के नोट जारी करते समय दिया था। एक तरफ महात्मा गांधी और दूसरी तरफ मंगलयान दिखाने वाले इस नोट ने देश में अकूत धन जमा करने वालों के मन में कितने सपने संजोए थे। इस नोट के आने और जाने की घोषणा के बीच 205,977,600 सेकेंड का समय लगा। इससे ज्यादा नोट तो लोगाें ने अपने घरों में जमा करके रख लिए। 

जब से 2000 के नोट चलन में आए, लोगों के मन में नोटों के म्यूजियम बनाने की इच्छा जोर मारने लगी। कई बड़े अफसरों, ठेकेदारों, नेताओं ने तो इतने ज्यादा नोट जमा कर लिए कि उनके यहां छापा मारने वाले ईडी को अपना नाम लिखने में कभी कोई दिक्कत ही नहीं आई। यह अलग बात है कि आरबीआई ने 2018-29 से ही इन नोटों की छपाई बंद कर दी थी। 

और अब आरबीआई ने कहा है कि बैंक 23 मई से 30 सितंबर तक लोगों से इन 2000 के नोट लेकर बदल सकते हैं। लेकिन एक बार में अधिकतम 20 हजार रुपए ही बदले जाएंगे। कितनी नाइंसाफी है। ऐसे शौकीन लोग जिन्होंने करोड़ों 2000 के नोट अपने बंगलों, दीवारों, सोफों, आलमारियों में संग्रह करके रखे होंगे, वे आखिर कितनी बार बैंकों में जाएंगे, इन्हें बदलवाने के लिए। ऐसे 15 सवालों के जवाब रिजर्व बैंक ने दिए हैं। नीचे हमने सभी जवाब आपके लिए एक जगह रखे हैं। लेकिन आगे बढ़ने से पहले ...

आइए देखते हैं इन नोटों के कुछ अद्भुत दृश्य। 


ये तमाम नजारे ईडी की ओर से देश के विभिन्न राज्यों में की गई छापेमारी में बरामद नोटों के हैं। आप देख सकते हैं कि इसमें भी 2000 के नोट ही सिरमौर बने हुए थे। इनकी खास बात यही है कि ये कम जगह में रखने पर भी दूसरे नोटों से कई गुना ज्यादा कीमत देते हैं। यह अलग बात है कि विपक्ष ने ईडी के इन छापों को राजनीतिक दुश्मनी के तहत बताते हुए इनके खिलाफ संसद से सुप्रीम कोर्ट तक मुहिम छेड़ दी। 

क्या सच है और क्या गलत, यह तो सरकार, विपक्ष और ईडी वाले ही जानें। पर यह सच है कि 2018-19 के बाद ईडी के ऐसे छापों में एकदम से बढ़ोतरी हो गई। यह महज संयोग ही हो सकता है कि यही वह साल भी था जबसे रिजर्व बैंक ने 2000 के नोट छापने बंद कर दिए थे। इन आंकड़ों के बारे में नीचे भी देखा जा सकता है। 


और अब आपको रिजर्व बैंक का नया आदेश दिखाते हैं और कुछ आंकड़े बताते हैं जो उसने इन नोटों को बंद करने के आदेश जारी करते समय दिए। दरअसल 2016 की नोटबंदी के समय केंद्र सरकार को उम्मीद थी कि भ्रष्टाचारियों के घरों के गद्दों-तकियों, बिस्तरे और सोफों में भरकर रखा कम से कम 3-4 लाख करोड़ रुपए का काला धन बाहर आ जाएगा। 

लेकिन नोटबंदी के बाद काला धन तो 1.3 लाख करोड़ ही बाहर आया। इसके बाद हुआ यह कि नोटबंदी के समय जारी नए 500 और 2000 के नोटों में अब 9.21 लाख करोड़ गायब जरूर हो गए हैं। इस बात भी काफी दुख है कि आरबीआई ने नोट बंद करने वाले आदेश में गुलाबी नोटों के वैसे फोटो जारी नहीं किए जैसे उसने नोट जारी करने वाले आदेश में दिखाए थे। 

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की 2016-17 से 2021-22 तक की एनुअल रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI ने 2016 से लेकर अब तक 500 और 2000 के कुल 6,849 करोड़ करंसी नोट छापे थे। उनमें से 1,680 करोड़ से ज्यादा करंसी नोट सर्कुलेशन से गायब हैं। 
इन गायब नोटों की वैल्यू 9.21 लाख करोड़ रुपए है। इनमें वो नोट शामिल नहीं हैं जिन्हें खराब हो जाने के बाद RBI ने नष्ट कर दिया।

क्या यह भी है वजह कि नोट छापने महंगे हो गए 

      

एक रिपोर्ट के अनुसार, नोट छापने के कागज और छपाई की लागत होने की वजह से भारत में नोटों की छपाई महंगी साबित हो रही है। खासकर, 2000 रुपये के नोट की छपाई में 10, 20, 50, 100 और 500 रुपये नोटों की छपाई के मुकाबले अधिक लागत आती है. हालांकि, 200 रुपये के नोट की छपाई 2000 रुपये के नोट से भी महंगी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2020-21 में 50 हजार रुपये के 1000 नोटों की छपाई का खर्च 920 रुपये था, जो साल 2021-22 में 23 फीसदी बढ़कर 1,130 रुपये हो गया। 

2000 रुपये के नोट की छपाई में 4 रुपये खर्च




रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2000 रुपये का एक नोट छापने में करीब 4 रुपये की लागत आती है। वर्ष 2018 में 2000 रुपये का एक नोट छापने में 4.18 रुपये का खर्चा आता था, जबकि 2019 में 2000 रुपये का एक नोट छापने में 3.53 रुपये खर्च होते थे। हालांकि, 2019 के बाद से भारत में 2000 रुपये के नोट की छपाई बंद है। 

एक दूसरी रिपोर्ट के अनुसार, 10 रुपये के 1000 नोट छापने में 960 रुपये यानी 1 रुपये से भी कम खर्च होता है। इसके अलावा, 100 रुपये के 1000 नोट की लागत 1770, 200 रुपये के 1000 नोट की लागत 2370 और 500 रुपए के 1000 नोटों की छपाई की लागत 2290 रुपए हैं। वहीं 2000 के 1000 नोट छापने में सरकार के 3530 रुपए खर्च होते थे। जाहिर है कि 2000 के इन नोटों काे छापना महंगा पड़ रहा था। 

वैसे इन नोटों को अपने घरों में छिपाकर रखना शायद कुछ लोगों को ज्यादा महंगा पड़ सकता है। ऐसे में गनीमत इसी में है कि मंगलवार 23 मई सुबह बैंक खुलते ही सभी अपने-अपने नोट लेकर बैंक पहुंच जाएं और नोट बदलवा लें। अगर आपको केवल नोट बदलवाने ही हैं तो इसकी लिमिट 20 हजार की है। अगर नोट केवल जमा करवाने हैं तो यह लिमिट नहीं है। आपके केवायसी के साथ जो भी नियम हैं वे ही लागू होंगे। आराम से जमा करते रहें, आपके पास अभी सितंबर तक का समय है। और अब हम आपको दिखा रहे हैं उन 15 सवालों के जवाब जो रिजर्व बैंक ने इन 2000 के नोटों की बंदी और इन्हें बदलवाने या बैंकों की जिम्मेदारी को लेकर जारी किए हैं। 

 








सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है, इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है

पहले मशहूर शायर शहरयार की यह ग़ज़ल पढ़िए... सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है दिल है तो धड़कने...