अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आठ साल... सेहत की चिंता का कोई और एजेंडा
आज पूरा देश, पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। राजस्थान के गर्म रेतीले धोरों से लेकर लद्दाख की ठंडी वादियों और गहरे समुद्र पर तैरते जहाजों से लेकर हवा में उड़ते विमानों तक लोग लोम-अनुलोम, कपाल भाति और सूर्य नमस्कार कर रहे हैं।
पूरे आठ साल हो गए, देश-दुनिया को योग दिवस मनाते हुए। आखिर इससे क्या बदलाव आया। क्या योग लोगों के जीवन का हिस्सा बन पाया। क्या योग से लोगों की जीवन शैली से जुड़ी या पहले से माैजूद बीमारियों में कुछ कमी आई। क्या योग करने की वजह से लोग की मानसिक, शारीरिक सेहत पहले से बेहतर हुई है। और यह भी कि .. क्या देश की वर्तमान आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक उथलपुथल वाले माहौल में योग कुछ भूमिका निभा सकता है।
ऐसे तमाम सवालों के जवाब के लिए आज हमने बात की है देश के जाने माने डॉ एके अरुण जी से। डॉ अरुण होम्यापैथी में एमडी हैं और रोगों के उपचार के साथ-साथ सामाजिक सरोकार से भी गहरा जुड़ाव रखते हैं। आज देखिए कि डॉ अरुण योग दिवस पर क्या कहते हैं।
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