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Thursday, May 18, 2023

ये पांच खबरें बताती हैं कि हमारा भविष्य खतरे में हैं, और इसकी वजह है....

 पहले इन पांच खबरों की सुर्खियां पढ़िए... 

  1. साढ़े 8 साल के बच्चे की किडनैपिंग फिर मर्डर:11वीं के छात्र ने 6 लाख की फिरौती मांगी, CID सीरियल देखकर घटना को दिया अंजाम
  1.  बहन से छेड़छाड़ से रोकने पर बच्चे की हत्या:तीन नाबालिगों ने गला घोंटा, चाकू मारे; क्राइम सीरियल और पब्जी के आदी हैं आरोपी 
  1.  आर्यन ने 10 दिन पहले प्लान किया पापा का मर्डर:कुल्फी में नींद की दवा दी; दोस्त आदित्य के पिता को भी मारने की साजिश थी
  1.  नाबालिग ने 9 साल के बच्चे को मार डाला:5 लाख की फिरौती मांगी; हाथ-पैर रस्सी से बांधे, चेहरे को कपड़े से ढका; फिर पैर से गला दबाया

  1. हिसार में छात्रों की दबंगई:अंग्रेजी टीचर ने स्कूल में डांटा तो रास्ते में घेरकर पीटा; बेइज्जत करने के लिए वीडियो बना वायरल किया 

निश्चित ही आपके दिल की धड़कनें बढ़ गई होंगी। यह महज तीन दिन में देश के तीन राज्यों में मासूम बच्चों के अपराधी बनने की ओर बढ़ने की पांच खबरें हैं। 

ये राज्य हैं मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और हरियाणा। महज संयाेग ही है कि इन तीनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान महाकाल लोक के बाद करीब 7-8 और धार्मिक लोक बनाने के लिए हजारों करोड़ खर्च करने की घोषणा कर चुके हैं। इसी राज्य के आदिवासी बहुल जिले सिवनी में तीन नाबालिग बच्चों ने 12 साल के एक बच्चे की बेहद निर्ममता के साथ हत्या कर दी। इसकी पूरी कहानी इसी ब्लाॅग में हम आपको बता चुके हैं। इसमें नया यह है कि मोबाइल पर क्राइम सीरियल देखने और पब्जी जैसे गेम खेलने के आदी थे। 

इसी तरह दिल को दहला देने वाली दो खबरें यूपी के मेरठ और रायबरेली की हैं। मेरठ में एक लड़के आर्यन ने अपने माता-पिता की हत्या की थी। जब इस वारदात का पूरा खुलासा हुआ तो किसी को भरोसा ही नहीं हुआ कि कोई बेटा ऐसा भी कर सकता है। इस बेटे आर्यन ने अपने माता-पिता की हत्या में अपने दोस्त आदित्य की मदद ली थी, जिसे इस हत्या के बाद इस दोस्त की मदद से अपने पिता की हत्या करनी थी। 

उधर रायबरेली में 15 साल के एक लड़के ने अपने पड़ोसी 9 साल के बच्चे को किडनैप कर मार डाला। उसने बच्चे के बदले उसके नाना को फोन कर 5 लाख की फिरौती मांगी। पर उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया। पुलिस में शिकायत करने की भी बात की। इससे डरकर आरोपी ने बच्चे के हाथ-पैर बांधे और पैर से गला दबाकर उसे मार डाला। हाथ से गला इसलिए नहीं दबाया ताकि उंगलियों के निशान न पड़ें।  

अब हरियाणा की ओर चलते हैं। यहां दो घटनाएं हुईं। पहली सोनीपत की है, जिसमें 11वीं में पढ़ने वाले 16 साल के एक लड़के ने अपनी ही सोसायटी में रहने वाले 8 साल के बच्चे को अगवा कर 6 लाख की फिरौती मांगी। उसे इसका आइडिया सीआईडी क्राइम सीरियल देखकर आया था। जब उसने बच्चे के हाथ-पैर बांधने की कोशिश की तो वह चिल्लाने लगा। इस पर उसके सिर पर हमला किया और उसे मार डाला। यह घटना हाईराइज अपार्टमेंट TDI एस्पानिया की है। 

दूसरी घटना हिसार की है। यहां एक सरकारी स्कूल के अंग्रेजी टीचर ने क्लास में स्टूडेंट को डांट दिया। इससे स्टूडेंट इतना नाराज हुआ कि उसने 3 दोस्तों से टीचर की पिटाई करवाकर उससे माफी मंगवाई। यही नहीं, टीचर को जलील करने के लिए मारपीट का वीडियो भी बनवाया। वीडियो  वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने आरोपी छात्र को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने टीचर के साथ मारपीट की बात को स्वीकार कर लिया।

इन पांचों घटनाओं में जो बात कॉमन है, वह यह है कि सभी आरोपी लगभग एक ही उम्र हैं। 12 से 16 साल के। अंतर है तो इनके बैकग्राउंड का। मध्यप्रदेश के सिवनी में रहने वाले निम्न मध्यमवर्गीय बच्चे के हैं, जिनका ज्यादातर समय मौज-मस्ती और मोबाइल देखने में ही बीतता है। वहीं यूपी और हरियाणा के साेनीपत के बच्चे उच्च मध्यम वर्ग के हैं। ये अच्छी सोसायटी में रहते हैं। अच्छे स्कूलों में पढ़ते हैं। इनके माता-पिता भी पढ़े-लिखे हैं, नौकरीपेशा हैं। लेकिन ये बच्चे भी मोबाइल की लत के साथ ही कई दूसरी फिजूलखर्ची के शिकार हैं। 

इन्हें मोबाइल ने ऐसी दूसरी दुनिया की लत लगा दी है, जिसे हासिल करने के लिए ये किसी भी हद तक जा सकते हैं। अपने दोस्तों की बर्बरता के हत्या कर सकते हैं। अपने पड़ोस में रहने वाले मासूम बच्चों की हत्या कर सकते हैं ताकि उसके बदले फिरौती में मिलने वाले पैसों से अपनी मोबाइल की दुनिया वाली जरूरतों को पूरा कर सकें। या अपने माता-पिता तक को मार सकते हैं। 

इन बच्चों का यह समाज भी हम ही बना रहे हैं। ये बच्चे एलियन नहीं हैं। ये किसी दूसरी दुनिया से नहीं आए हैं। ये हमारे आस-पास ही हैं। ये रोज हमें देखते हैं, हमारी कथनी और करनी काे परखते हैं। हम जो करते हैं, उसे अपने हिसाब से, अपनी सीख और अपनी समझ के मुताबिक दोहराते हैं। ये मोबाइल की अपनी दुनिया में जिन सुविधाओं को ढूंढते हैं उन्हें पूरा करने के लिए इन्हें अपराध करने से कोई नहीं रोकता। न इनकी समझ, न इनका विवेक और न ही इनका समाज, यानी हम। क्योंकि हम सब अपनी जरूरतों को पूरा करने की अंधी दौड़ में इस कदर भाग रहे हैं कि यह देख ही नहीं पा रहे कि हमारा भविष्य अंधेरे में गुम होता जा रहा है। 

क्या यही सही समय नहीं है कि यह देखने का समाज, सरकार मिलकर बच्चों को इस अंधेरे में जाने से रोके। एक दूसरे पर तोहमत लगाने के बजाय एक दूसरे की मदद से कोई समाधान तलाशें। राजनीति करने के लिए भी इंसानों की ही जरूरत होगी। अगर हमारे समाज में हैवान बढ़ जाएंगे तो हम विकास करने या राजनीति करने की जगह केवल अपनी जान बचाने की फिक्र में ही सारी उम्र जीते रहेंगे। 




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